Maa Kalratri 2025 Seventh Navratri

Maa Kalratri 2025 Seventh Navratri

Maa Kalratri – The Seventh Form of Navdurga

Maa Kalratri 2025 Seventh Navratri : On the seventh day of Navratri, Maa Kalratri is worshipped. She is the most fierce and powerful form of Goddess Durga, known for destroying evil forces and negative energies.

🪔 Appearance of Maa Kalratri

  • She has a dark complexion and a fearsome form.
  • Her hair is loose and untamed, symbolizing her immense power.
  • She has four hands, holding a sword and an iron hook, while the other two are in Abhaya Mudra (blessing posture) and Varada Mudra (boon-giving posture).
  • She rides a donkey (gadarbh), representing humility despite her immense power.
  • Flames radiate from her breath, and her eyes shine bright like lightning.

Significance of Maa Kalratri

  • She is the destroyer of darkness and ignorance.
  • She eliminates fear, evil forces, and obstacles from the lives of devotees.
  • Worshiping her grants courage, protection, and spiritual power.

📖 Legend of Maa Kalratri

According to mythology, when the demons Shumbha and Nishumbha created havoc, Maa Durga took the form of Kalratri to destroy them. She also killed Raktabeej, a demon whose blood drops created more demons. Maa Kalratri drank his blood before it could touch the ground, ensuring his complete destruction.

Puja Vidhi (Worship Rituals)

  1. Offerings: Jaggery, sesame seeds, and red flowers.
  2. Chant Mantra:
    “Om Devi Kalratryai Namah”
  3. Light a diya (lamp) with mustard oil to remove negativity.
  4. Offer prayers and meditate to seek her divine blessings.

Benefits of Worshiping Maa Kalratri

  • Removes fear, anxiety, and negativity
  • Grants courage and self-confidence
  • Protects from evil forces and black magic
  • Helps in spiritual growth and enlightenment

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🌑 माँ कालरात्रि – सप्तम नवरात्रि 🌑

माँ कालरात्रि नवरात्रि के सातवें दिन पूजी जाती हैं। वे संहार और रक्षा की देवी हैं, जो असुरों और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं

माँ कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है, क्योंकि वे भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं

🪔 माँ कालरात्रि का स्वरूप

  • इनका रंग काला (श्यामवर्ण) है।
  • उनके बाल बिखरे हुए हैं, और तीव्र अग्नि जैसी ज्योति उनके मुँह से निकलती है।
  • माँ के चार हाथ हैं –
    🔹 एक हाथ में खड्ग (तलवार)
    🔹 एक हाथ में वज्र
    🔹 एक हाथ अभय मुद्रा (रक्षा का आशीर्वाद) में
    🔹 एक हाथ वरद मुद्रा (मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद) में
  • वे गर्दभ (गधे) पर सवार रहती हैं।
  • जब वे गर्जना करती हैं, तो बुरी शक्तियाँ काँपने लगती हैं

📖 माँ कालरात्रि की कथा

जब राक्षस शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज का आतंक बढ़ गया, तो माँ दुर्गा ने अपने भीतर से कालरात्रि रूप को प्रकट किया

माँ कालरात्रि ने रक्तबीज का वध किया, जो अपने खून की हर बूँद से एक नया राक्षस जन्म देता था। उन्होंने उसका सारा रक्त पी लिया और उसे समाप्त कर दिया।

इसलिए माँ कालरात्रि भय का नाश करने वाली और बुरी शक्तियों का संहार करने वाली देवी हैं

🙏 माँ कालरात्रि की पूजा विधि

🕉 मंत्र:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

  • 🌺 पूजा सामग्री:
  • नीले या लाल फूल
  • रोली, चंदन, अक्षत
  • गुड़ और नारियल का भोग

🔥 भोग:
माँ कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाने से रोग, भय और दुर्भाग्य समाप्त होते हैं

🎨 रंग:
सातवें नवरात्रि पर नीला (Blue) या काला (Black) रंग पहनना शुभ होता है, यह शक्ति और रहस्य का प्रतीक है।

🌼 माँ कालरात्रि की कृपा से लाभ

  • भय, नकारात्मकता और शत्रुओं से रक्षा होती है।
  • भूत-प्रेत बाधा और तंत्र-मंत्र का प्रभाव समाप्त होता है।
  • साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • सभी बुरे ग्रहों (विशेषकर शनि) का निवारण होता है।

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